Diwali 2023

दिवाली पूजा का शुभ समय/मुहूर्त कब है? || When is the auspicious time for Diwali puja? 

समय/मुहूर्त(Time of Diwali Pujan)

दिवाली एक विशेष उत्सव है जो अमावस्या के दिन मनाया जाता है। इस वर्ष(2023), अमावस्या 12 नवंबर को दोपहर 2:43 बजे शुरू होगी और अगले दिन 13 नवंबर को दोपहर 12:56 बजे तक रहेगी। दिवाली पर लक्ष्मी नामक देवी की पूजा करने का महत्व है। ऐसा करने का सबसे अच्छा समय 12 नवंबर को शाम 5:29 बजे से रात 8:08 बजे के बीच है।

In English

Diwali is a special festival which is celebrated on the day of Amavasya. This year (2023), Amavasya will start at 2:43 pm on November 12 and will last till 12:56 pm the next day on November 13. There is importance of worshiping Goddess Lakshmi on Diwali. The best time to do this is between 5:29 pm and 8:08 pm on November 12.


Diwali Pujan Material/Samagiri (दिवाली पूजा सामग्री)

        हिंदी में                                                      In English
  1. एक चौकी
  2. लाल कपड़ा
  3. भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की प्रतिमा या फोटो
  4. सुपारी
  5. लौंग
  6. इलायची
  7. अक्षत यानी साबुत चावल के दानें
  8. एक तांबे या पीतल का कलश
  9. दो नारियल
  10. 2 बड़े दीपक
  11. 11 छोटे दीपक
  12. आम के पत्ते
  13. पान के पत्ते
  14. कुमकुम
  15. हल्दी
  16. दूर्वा
  17. मौली
  18. घी
  19. जल पात्र
  20. गंगाजल
  21. पुष्प
  22. कमल का फूल
  23. मीठे बताशे
  24. खील
  25. मिठाई
  26. फल
  27. पकवान
  28. सरसों का तेल
  29. दीये की बाती
  30. धूप
  31. अगरबत्ती
  32. मेवे
  1. A small table
  2. Red Cloth
  3. Statue or Photo of lord Ganesha and mother Laxmi
  4. Betal
  5. Cloves
  6. Cardamom
  7. Akshat i.e. Whole rice grains
  8. A copper or brass pot
  9. Two coconuts
  10. Two large Dipakas
  11. Eleven small Dipakas
  12. Leaves of mango
  13. Betel Leaves
  14. Kumkum
  15. Turmeric
  16. Durva
  17. Molly
  18. Ghee
  19. Water Container
  20. Ganga Water
  21. Flower
  22. Lotus Flower
  23. Sweet Talk
  24. Kheel
  25. Sweet
  26. Fruit
  27. Dish
  28. Mustered oil
  29. Lamp Wick
  30. Dhoop
  31. Incense Sticks
  32. Dry Fruits

Laxmi Ji's Aarti (लक्ष्मी जी की आरती)


ओम जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।

तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥

ओम जय लक्ष्मी माता॥

उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।

सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥

ओम जय लक्ष्मी माता॥

दुर्गा रुप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता।

जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥

ओम जय लक्ष्मी माता॥

तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता।

कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥

ओम जय लक्ष्मी माता॥

जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता।

सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥

ओम जय लक्ष्मी माता॥

तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।

खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥

ओम जय लक्ष्मी माता॥

शुभ-गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता।

रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥

ओम जय लक्ष्मी माता॥

महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता।

उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥

ओम जय लक्ष्मी माता॥


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